किसी ने पूछा क्या अपने लिए कभी जिए तब होश आया, हाय हम क्या से क्या हो गए । किसी ने पूछा क्या अपने लिए कभी जिए तब होश आया, हाय हम क्या से क्या हो...
हल्के हल्के दबे पाँव जीवन की होती छाँव बुढ़ापा है ऐसा पड़ाव हल्के हल्के दबे पाँव जीवन की होती छाँव बुढ़ापा है ऐसा पड़ाव
यूँ अकेले सिसकते हम जुदाई सहे कोई ग़म नहीं यूँ अकेले सिसकते हम जुदाई सहे कोई ग़म नहीं
गुज़र गया जो वक्त हाथ कहां आएगा, गुज़र गया जो वक्त हाथ कहां आएगा,
हज़ार मिन्नतें और लाख मनुहार के बाद भी, उनकी खामोशी नही टूटती, बल्कि और मजबूत हो जाती है..... हज़ार मिन्नतें और लाख मनुहार के बाद भी, उनकी खामोशी नही टूटती, बल्कि और मजबूत हो ...
नए मिलन से तुम्हारे नए लक्ष्य से मुकाबला हो गया। नए मिलन से तुम्हारे नए लक्ष्य से मुकाबला हो गया।